NEET UG 2026 पेपर लीक: परीक्षा तंत्र में लगी सेंध, CBI के रडार पर NTA के ‘अंदरूनी’ लोग
देश के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। जांच एजेंसी ने इस पूरे काले कारोबार के मुख्य सूत्रधार यानी ‘किंगपिन’ को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किया गया आरोपी कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा एक वरिष्ठ प्रोफेसर है।
A day earlier, the CBI arrested chemistry lecturer PV Kulkarni, whom the agency has described as the alleged “kingpin” of the paper leak operation.
इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर भारत की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की शुचिता, सुरक्षा और NTA के आंतरिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन है मास्टरमाइंड और कैसे हुआ खुलासा?
CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी की पहचान पी. वी. कुलकर्णी (PV Kulkarni) के रूप में हुई है। कुलकर्णी महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले हैं और पुणे में रसायन विज्ञान (Chemistry) के लेक्चरर के रूप में कार्यरत थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह पिछले कई वर्षों से NTA के उस पैनल का हिस्सा थे, जो NEET परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करता है।
NTA के लिए काम करने के कारण कुलकर्णी की पहुंच सीधे असली प्रश्नपत्रों तक थी। जांच में सामने आया है कि उन्होंने अपनी इसी पहुंच का गलत फायदा उठाया और परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिए।
घर पर चलाई जा रही थी ‘सीक्रेट कोचिंग’
CBI की चार्जशीट और रिमांड पेपर्स के मुताबिक, प्रोफेसर कुलकर्णी ने अप्रैल के आखिरी हफ्ते में (3 मई को होने वाली परीक्षा से ठीक पहले) पुणे स्थित अपने आवास पर एक गुप्त कोचिंग क्लास का आयोजन किया था। इस क्लास में छात्रों को जुटाने का काम उनकी सह-आरोपी मनीषा वाघमारे (पुणे की एक ब्यूटी सैलून मालिक) ने किया था।
इस सीक्रेट क्लास के दौरान प्रोफेसर कुलकर्णी ने छात्रों को हूबहू वही सवाल, उनके विकल्प और सही उत्तर अपनी जुबान से बोलकर (Dictate) लिखवाए, जो मुख्य परीक्षा में आने वाले थे। छात्रों ने इन सवालों को अपनी कॉपियों में नोट किया। जब CBI ने इन नोटबुक्स को जब्त कर जांच की, तो वे सवाल NEET UG 2026 के वास्तविक प्रश्नपत्र से अक्षरशः (Exactly) मेल खा रहे थे। इस ‘स्पेशल क्लास’ के बदले छात्रों और उनके अभिभावकों से लाखों रुपये वसूले गए थे।
पूरे देश में फैला था दलालों का जाल
यह पेपर लीक सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा जैसे कई राज्यों में फैला हुआ था। CBI की जांच में इस सिंडिकेट की कड़ियों का सिलसिलेवार खुलासा हुआ है:
- मनीषा वाघमारे (पुणे): छात्रों को इकट्ठा करने और उन्हें कुलकर्णी की सीक्रेट क्लास तक पहुंचाने का जरिया बनी।
- धनंजय लोखंडे (अहिल्यानगर): आयुर्वेद चिकित्सक (BAMS), जिसने मनीषा वाघमारे से लीक हुआ परीक्षा मटेरियल लिया और उसे आगे बढ़ाया।
- शुभम खैरनार (नासिक): लोखंडे से प्रश्नपत्र प्राप्त कर इसे बेचने और मुनाफा कमाने के लिए जिम्मेदार था। शुभम ने ही इसे टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए आगे फॉरवर्ड किया।
- यश यादव (गुरुग्राम): हरियाणा का एक छात्र, जिसने शुभम खैरनार से पीडीएफ (PDF) फॉर्मेट में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्नपत्र हासिल किए।
- मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल (जयपुर): राजस्थान के सीकर और जयपुर में सक्रिय कोचिंग एजेंट। मांगीलाल ने अपने छोटे बेटे के लिए ₹10-12 लाख में पेपर का सौदा किया था। इस परिवार पर पिछले वर्षों में भी पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है।
इन दलालों ने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स (Telegram और WhatsApp) का इस्तेमाल करके कुछ ही घंटों में इस लीक पेपर को देश के सैकड़ों छात्रों तक पहुंचा दिया।
NTA के अधिकारी अब CBI के रडार पर
वर्ष 2024 के NEET विवाद के विपरीत—जहां जांच एजेंसियों ने शुरुआत में कहा था कि कोई बड़े पैमाने पर सिस्टमैटिक लीक नहीं हुआ है—इस बार यानी 2026 में CBI ने अदालत के सामने सीधे तौर पर NTA के अधिकारियों की संलिप्तता की बात स्वीकार की है।
“आरोपियों की कस्टोडियल पूछताछ इसलिए जरूरी है ताकि उन डिजिटल उपकरणों और वित्तीय लेन-देन के रास्तों का पता लगाया जा सके, जिनके जरिए यह खेल खेला गया। साथ ही, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उन अधिकारियों की पहचान की जा सके जो इस पेपर लीक की साजिश में अंदर से शामिल थे।”
— CBI रिमांड नोट
जांच एजेंसी का मानना है कि प्रोफेसर कुलकर्णी के अलावा NTA के भीतर कुछ और बड़े चेहरे हो सकते हैं जिन्होंने परीक्षा की गोपनीयता को भंग करने में मदद की। बहुत जल्द CBI के अधिकारी NTA के मुख्यालय और उससे जुड़े अधिकारियों से सीधे पूछताछ करने की तैयारी में हैं।